"ये चाँद चमकना छोड़ भी दे, तेरी चांदनी मुझे सताती है
तेरे जैसा ही था उसका चेहरा, तुझे देख के वो याद आती है...।।

"कितने अनमोल होते हैं यह मोहब्बत के रिश्ते
भी कोई याद न भी करे फिर भी इंतज़ार रहता है...।।

"तेरी याद आती है तो आँख भर ही आती है
वरना हर बात पर यूँ रोने की आदत नहीं मुझे...।।

"मुस्कुरा जाता हूँ अक्सर गुस्से में भी तेरा नाम सुन कर
तेरे नाम से इतनी मोहब्बत है तो सोच तुझसे कितनी होगी...।।

"खुल जाता है तेरी यादों का बाजार सुबह सुबह
और इसी रौनक में मेरा दिन गुज़र जाता है...।।

"अपनी तनहाई तेरे नाम पे आबाद करे
कौन होगा जो तुझे मेरी तरह याद करे...।।

"उसकी याद आई है साँसों जरा अहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है...।।

"नहीं कोई जरुरत याद रखने की हमे
हम खुद ही याद आएँगे जहाँ जिक्र ऐ वफ़ा होगा...।।

"कभी उनकी याद आती है कभी उनके ख्व़ाब आते हैं
मुझे सताने के सलीके... तो उन्हें बेहिसाब आते हैं...।।

"नींद में भी गिरते हैं मेरी आँख से आंसू
जब भी तुम ख्वाबों में मेरा हाथ छोड़ देती हो...।।

"मेरी ज़िंदगी तो है, पर उसका मतलब कुछ नही
पूरा हो कर भी अधूरा है सब, संग मेरे तू जो नही...।।

"सुना है के तुम रातों को देर तक जागते हो
यादों के मारे हो या मोहब्बत में हारे हो...।।

"खुद पूछो अपने दिल से कि मुझको भुलाना चाहता है
अगर वो ” हाँ ” कह दे तो कसम से मोहब्बत छोड़ दूँगा...।।

"हम अपने नही अपनो के सहारे जी लिया करेंगे
आप याद आयोगी कभी कभी तो पि लिया करेंगे...।।

"दिल मजबूर हो रहा है तुम से बात करने को
बस जिद ये है कि सिलसिले का आग़ाज़ तुम करो...।।

"दिल में उसकी चाहत और लबों पे उसका नाम है
वो वफ़ा करे ना करे जिन्दगी अब उसी के नाम है...।।

"छोडो अब जाने भी दो क्या रखा है कुछ सुनने सुनाने में
किसी ने कसर नही छोड़ी दिल दुखाने में...।।

"मेने सारी शिकायते जोड़-जोड़ के रखी थी
उसने गले लगाकर सारा हिसाब बिगाड़ दिया...।।

"इश्क की गहराईयों में खूबसूरत क्या है
मैं हूँ, तुम हो और कुछ की ज़रुरत क्या है...।।

"अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो...।।

"बाज़ी-ए-मुहब्बत में हमारी बदकिमारी तो देखो
चारों इक्के थे हाथ में, और एक बेग़म से हार गये...।।

"नहीं है कुछ भी मेरे दिल में सिवा उसके
मैं उसे अगर भुला दूँ तो याद क्या रखूँ...।।

"तू देख सकता काश रात के पहरे में मुझको
कितनी बेदर्दी से तेरी याद मेरी नींद चुरा लेती है...।।

"तुम्हारा ख्याल भी तुम्हारी तरह मेरी नही सुनता
जब आता है तो बस आता ही चला जाता है...।।

"मेरी यादों की कश्ती उस समुन्दर मेँ तैरती हैं
जिस में पानी मेरी अपनी पलको का ही होता है...।।

"इक अजीब सी बेताबी है तेरे बिन
रह भी लेते हैं और रहा भी नहीं जाता...।।

"जुल्म के सारे हुनर हम पर यूँ आजमाये गये
जुल्म भी सहा हमने, और जालिम भी कहलाये गये...।।

"कुछ खूबसूरत पलों की महक सी हैं तेरी यादें
सुकून ये भी है कि ये कभी मुरझाती नहीं...।।

"कभी बदली सा बरसना कभी चाँद सा छुप जाना
उफ़्फ़्, बहुत खलता है तेरा यूँ चुपके से चले जाना...।।