"चाँद भी देखा, फूल भी देखा
बादल बिजली, तितली जुगनूं
कोई नहीं है ऐसा तेरा हुस्न है जैसा..!!!

"क्या लिखूं तेरी तारीफ-ए-सूरत में यार
अलफ़ाज़ कम पड़ रहे हैं तेरी मासूमियत देखकर..!!!

"ये उड़ती ज़ुल्फें और ये बिखरी मुस्कान
एक अदा से संभलूँ तो दूसरी होश उड़ा देती है..!!!

"होश-ए-हवास पे काबू तो कर लिया मैंने
उन्हें देख के फिर होश खो गए तो क्या होगा..!!!

"ढाया है खुदा ने ज़ुल्म हम दोनों पर
तुम्हें हुसैन देकर मुझे इश्क़ देकर..!!!

"कसा हुआ तीर हुस्न का, ज़रा संभल के रहियेगा
नजर नजर को मारेगी, तो क़ातिल हमें ना कहियेगा..!!!

"अच्छे लगे तुम सो हमने बता दिया
नुकसान ये हुआ कि तुम मगरूर हो गए..!!!

"कैसे बयान करें सादगी अपने महबूब की
पर्दा हमीं से था मगर नजर भी हमीं पे थी..!!!

"तेरे हुस्न का दीवाना तो हर कोई होगा
लेकिन मेरे जैसी दीवानगी हर किसी में नहीं होगी..!!!

"देख कर तेरी आँखों को मदहोश मै हो जाता हूँ
तेरी तारीफ किये बिना मै रह नहीं पता हूँ..!!!

"कैसी थी वो रात कुछ कह सकता नहीं मैं
चाहूँ कहना तो बयां कर सकता नहीं मैं..!!!

"रोज इक ताज़ा शेर कहाँ तक लिखूं तेरे लिए
तुझमें तो रोज ही एक नई बात हुआ करती है..!!!

"उसके हुस्न से मिली है मेरे इश्क को ये शौहरत
मुझे जानता ही कौन था तेरी आशिक़ी से पहले..!!!

"ये आईने ना दे सकेंगे तुझे तेरे हुस्न की खबर
कभी मेरी आँखों से आकर पूछो के कितनी हसीन हों तुम..!!!

"दुनिया में तेरा हुस्न मेरी जां सलामत रहे
सदियों तलक जमीं पे तेरी कयामत रहे..!!!

"तुझको देखा तो फिर किसी को नहीं देखा
चाँद कहता रहा मैं चाँद हूँ… मैं चाँद हूँ..!!!

"चाँद की चाँदनी हो तुम, तारो की रोशनी हो तुम
सुबह की लाली हो तुम, मेरे दिल में बसी हुई एक आशिक़ी हो तुम..!!!

"तेरी हुस्न की क्या तारीफ करू ए जालिम
तेरी तुलना करने में तो आप्सरायो का चेहरा भी आँखों से ओझल हो जाता है..!!!

"हमने तो शिर्फ़ आपको देखा
आपका चेहरा इतना हसीन हैं कि
हुस्न वाले भी आप के चेहरे पर मर जाय..!!!

"ये तेरा हुस्न औ कमबख्त अदायें तेरी
कौन ना मर जाय,अब देख कर तुम्हें..!!!

"क्या हुस्न था कि आँख से देखा हजार बार
फिर भी नजर को हसरत-ए-दीदार रह गयी..!!!

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